Tuesday 3 april 2012
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15:47
टीस ह्रदय में रोज दहकती साँझ ढले.
अम्बर विशाल कुछ पूछे मुझसे साँझ ढले.
मैं शब्दहीन चुपचाप निहारूँ तारों को.
एक नीरधार देती उत्तर सब प्रश्नों का.
मैं दीन हीन निर्लज्ज खड़ा वीराने में.
सोचू क्यूँ इतना विवश विकल मैं आज यहाँ.
क्या प्रेम हमेशा इतनी दुविधा देता है.
या ये क्षण आता है सब के ही जीवन में.
क्यूँ इतने उत्तर बिना प्रश्न के यहाँ खड़े.
ये क्या, कैसा है, कुछ अजीब सा लगता है.
सब बिखर गए गुमनाम बगीचे में मुझसे.
शमशान पी गए चिता मेरी अंधियारे में.
By ashutosh
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Monday 25 october 2010
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14:09
किसी पर्वत से भिड़ जाने की, बादल बन के उड़ जाने की
सूरज संग पेंच लड़ाने की मेरी अभिलाषा बाकी है.
सपने जिंदा हैं मरें नहीं, अरमां अभी पूरे करे नहीं
ऊँचे अभी पेंग बढ़ाने की मेरी अभिलाषा बाकी है.
सौ मील चला और सिफ़र रहा, पर तेज़ हवा में निडर रहा.
अभी आंधी से टकराने की मेरी अभिलाषा बाकी है.
कितना भी बिकट सितम होगा हौसला कभी न कम होगा
तकदीरों से लड़ जाने की मेरी अभिलाषा बाकी है.
By ashutosh
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Friday 6 august 2010
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11:59
मेरे होने न होने का वजूद नहीं है.
क्यूँ ऐसे हालात पैदा हुए हैं?
क्यों मेरा फलसफा सिर्फ मेरा है?
ऐसा तो नहीं था मैं और ना ही तुम.
मैं अकेला जी रहा हूँ और तुम भी.
मेरा समाज मर चुका है.
और तुम्हारा भी.
ज़िन्दगी के रंग काले पड़ गए.
विधवा सा जीवन जी रहा हूँ मैं.
और तुम भी.
क़ैद एक दायरे में.
यहाँ से वहाँ और वहाँ से यहाँ.
बस इतनी सी दुनिया है क्या?
शायद इतनी ही होगी?
मेरी भी और तुम्हारी भी.
मुझे खा जाएगी तन्हाई.
और तुम्हे भी.
By ashutosh
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Thursday 5 august 2010
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13:40
कविता अधूरी है प्यार की.
मेरी ज़िन्दगी की तरह.
तुम आ जायो प्रिये.
मुझे गीत लिखना है .
मेरे प्यार का.
मुझे दर्द बताना है.
मेरे दिल का.
तुम घुल चुके हो.
मेरी साँसों में.
जैसे शकर घुलती है.
पानी में.
पर तुम्हे एहसास नहीं है.
मुझे है.
आ जायो मेरे करीब.
मुझे कविता पूरी करनी है.
मुझे प्यार पूरा करना है.
By ashutosh
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Tuesday 11 may 2010
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13:01
प्रिये,
मुझे अकेला छोड़ दो
प्रतिकूल समय और परिस्तिथियों में,
मुझे अकेला छोड़ दो.
इसे तुम स्वार्थ कहो या मेरा अभिमान,
या मुझे कुछ और नाम दो, जो तुम्हे सूझता हो,
और मुझे अकेला छोड़ दो.
वक़्त जो मेरा है और बेहतर नहीं है,
उसे अपना ही रखूँगा
और सिर्फ अपना.
तुम्हारा कोई हक नहीं उसपे
इसलिए मुझे अकेला छोड़ दो.
तन्हाई मुझे ताक़त देगी,
फिर से खुद को समेटने,
जुड़ने और उठ खड़ा होने की
इसलिए मुझे अकेला छोड़ दो.
डरो मत चिंता भी मत करो,
ऐसे हालात ले के कुछ नहीं जाते,
सिर्फ दे जाते हैं,
और बेहतर जीने का तरीका
और
सुधार का एक और मौक़ा
इसलिए मुझे अकेला छोड़ दो.
By ashutosh
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