किसी पर्वत से भिड़ जाने की, बादल बन के उड़ जाने की सूरज संग पेंच लड़ाने की मेरी अभिलाषा बाकी है. सपने जिंदा हैं मरें नहीं, अरमां अभी पूरे करे नहीं ऊँचे अभी पेंग बढ़ाने की मेरी अभिलाषा बाकी ...
मेरे होने न होने का वजूद नहीं है. क्यूँ ऐसे हालात पैदा हुए हैं? क्यों मेरा फलसफा सिर्फ मेरा है? ऐसा तो नहीं था मैं और ना ही तुम. मैं अकेला जी रहा हूँ और तुम भी. मेरा समाज मर चुका है. और तु ...
कविता अधूरी है प्यार की. मेरी ज़िन्दगी की तरह. तुम आ जायो प्रिये. मुझे गीत लिखना है . मेरे प्यार का. मुझे दर्द बताना है. मेरे दिल का. तुम घुल चुके हो. मेरी साँसों में. जैसे शकर घुलती है. प ...
प्रिये, मुझे अकेला छोड़ दो प्रतिकूल समय और परिस्तिथियों में, मुझे अकेला छोड़ दो. इसे तुम स्वार्थ कहो या मेरा अभिमान, या मुझे कुछ और नाम दो, जो तुम्हे सूझता हो, और मुझे अकेला छोड़ दो. वक़् ...
कल जो मेरे साथ में था, तन्हा-तन्हा वो जाने क्यूँ? उनके दिल की ही वो जाने, अपने दिल की वो जाने क्यूँ? चट्टानों में आग लगी, क्यूँ धुँआ उठा वो जाने क्यूँ? बुरा वक़्त है, हवा बुरी, अब वो हमको पहचाने ...
महान क्रांतिकारी कवी और शायर आशुतोष जी का अवतरण राजस्थान के नागौर जनपद के एक अस्पताल में चैत की अष्टमी संवत २०३७ को माना जाता है . हालाँकि इनकी जन्म तिथि के बारे में विद्वानों में मतभेद हैं. कु ...
ख़ुल के जियो भुला के अपराधबोध खुद को बेहतर बना लो कल के लिए सुबह फिर एक अपनी करो शाम फिर एक अपनी लिखो इंसान ही करता है गलती एक सज़ा उम्र भर दो खुद को उसकी ये तकाज़ा नहीं रखो अपनी बात कहो अपनी बा ...
पिता बनने का सुख महसूस किया मैंने अब बिलकुल अपने पिता की तरह लगता हूँ मैं नौ महीने एक एक दिन एक माँ की तरह महसूस किया मैंने रोज इंतज़ार किया बेचैनी से जैसे प्रेयसी वादा कर के गयी हो कुछ भी हो मैं ज ...
साँसों से घुटती ज़िन्दगी हर रोज मर रही थी पल पल मौत की दुआ मांगते लोग तन्हा अकेले हर पल मौत से बचना नामुमकिन बस आसान होगी या मुश्किल यही है दुविधा बोझ हर घड़ी सपनो का , अपनों का गरीबी मानती नहीं ...
नूतन वर्ष का मेरा नूतन ख्वाब मैं देखना चाहूँगा नए साल में सबके सपने पूरे होते जैसे मेरे हुये मैं चाहूँगा हर भूख को रोटी मिले रोज़ मेरे हर भाई को काम मिले जिसे मैं जानता हूँ और जिसे मैं नही ...
अब हाल उनका मालूम पड़ता है अखबारों से हमने दर्द को रिसते देखा है दरारों से छतों को उखाड़ के ले गए घरों की हमारी हमने बरसात गुजारी है इन दीवारों से शहर छोड़ देते हम भी ओरों की तरह नाव बढ़ न सकी ...
खामोश जिस्म में भी जान अभी बाकी है तेरी वफाओं का निशान अभी बाकी है थम गयी दिल में हरारत जो तेरे दम से थी बुझे से दिल में भी अरमान अभी बाकी है हिल गया मेरा आशियाना इन थपेड़ो से आने वाला बड ...
सर्दी में पुरानी पुलिया के नीचे जो फ़कीर रहता था मर गया आज लोग आ रहें हैं जा रहें हैं भीड़ जमा है पुलिया पे गुजरते हुये देख लेते हैं लोग झाँक कर एक पल नीचे कोतुहल होता है देखने का पर रुकने का ...
कल की रात सबसे हसीन रात थी उसने चूमा मेरे गुलाबी होठों को एक एहसास एक ज़ुम्बिश रोम रोम में सिहरन और वो घबराहट भी पता नहीं कैसी मैं अन्दर से अभिभूत थी और एक अनजाना डर भी पता नहीं ...
ना पूछ मेरी हसरत मैं क्या चाहता हूँ तेरा प्यार चाहता हूँ तेरा दर्द चाहता हूँ अपना नाम ज़ुबां तेरी चाहता हूँ अपने दिल में हरारत तेरी चाहता हूँ तेरा चेहरा मेरी आँखे रूबरू चाहता हूँ हर पल है त ...
मेरी मज़ार पे आना तुम एक पल के लिए मेरे घर को भी सजाना तुम एक पल के लिए यहीं बनाऊंगा ज़न्नत मैं दो ज़हानो की गरीबखाने में आना तुम एक पल के लिए कहीं खो जायेंगे अँधेरे उम्र भर के लिए चराग़ द ...
सन्नाटा शहर का बहरों को दिया जाता है हर तरफ लूट का व्यापार किया जाता है लोग खरीद रहे हैं दर्द अपनों से अपनों के लिए ऐसे हालात में भला कैसे जिया जाता है देव एक जी गया मंथन के गरल को पी कर यहाँ र ...
तुम्हें देखा आज अचानक बाज़ार में, तुम बिलकुल वैसी ही थीं जैसा कई साल पहले मैंने क़ैद किया था तुम्हें अपनी डायरी में शायद कोई ताला टूट गया जो तुम निकल आंई या कोई पन्ना हवा से खुल गया जो नही ...
अब पड़ोसी की मौत पे कोई मातम नहीं होता अब दोस्त के दर्द का एहसास नहीं होता अब तक़लीफ हमें मुफलिश की दिखाई नहीं देती अब वक़्त पे अज़ीज़ कोई पास नहीं होता लाचार है इंसान अब खुदगर्ज़ी से अपनी अब ...
ज़िन्दगी ने गुजारा है तमाम दौर से मुझको हर एक हादसे ने परखा है बड़े गौर से मुझको चला गया कल रात चुपचाप वो वादा-ऐ-वफ़ा ख़बर मिली है ये आज किसी और से मुझको कल ख़ुमारी में बज़्म में कुछ सच भी कह ...
वो जिसके वास्ते जीता था रात दिन मैं बस वो अपने साथ मेरे सारे हुनर ले के गया मुझे ही छोड़ दिया उसने उम्र भर तन्हा वो अपने साथ में सारे शहर को ले के गया सजा मिली है, मुझे उस से दिल लगाने की मेर ...
कोई अलफ़ाज़ मेरी हालतों का बन न सका मेरी उम्मीद मेरी चाहतों का बन न सका कोई अफवाह मेरी दोस्ती की हो न सकी कोई हमराह मेरे रास्तों का बन न सका इस चमन को मयस्सर फिज़ा भी हो न सकी कोई गुलफ़ाम मे ...
हर लम्हा गीत बन जाता है तेरे पहलू में आ के जो तू गुनगुना दे तो ख़ुदा जाने क्या हो तेरी सांस से देखी हर सूं महकती खुशबू जो तू मुस्कुरा दे तो ख़ुदा जाने क्या हो तेरे सिमटे गेसूं जैसे आसमा ...
अज़ब आवारगी को खुद पे हमने आजमाया है शहर एक घूमता बंजारा पूरा दिल में पाया है चले बहके कदम बस्ती को किस, ये तो खुदा जाने हमें तो रास्ता मंजिल की माफ़िक रास आया है सफ़र में डाल दी मंज़िल की गाड ...
हालात की कोख़ से पाप निकलते देखें हैं हमने आस्तीनों से सांप निकलते देखें हैं अमीरों की प्लेट में देखी है भरपेट जूठन गरीबों के पेट से अलाव निकलते देखें हैं टूटते देखे हैं अरमान भी मुफलिसों के ...
हमने बुझा दिए वो चराग़ जो मेरे जीवन में उजाला करते थे हमने मिटा दिए वो निशान जो तेरे घर तक ले जाते थे, मेरे कदमों को हमने आखिर वही रास्ता चुना जो ले जाता है मुझे किसी खाई की तरफ और एक ऐसी खाई, जो ...
बदलते रहे हैं शहर हर एक हादसे के बाद बाकी हैं हादसे कई अब शहर नहीं हैं दिल में लिए फिरते हैं हम एक ख्वाब सुहाना तकदीर की बाकी मगर कोई महर नहीं है एक रात ही आती है, मेरी रात के हर बाद कोई द ...
एक दिन अपनों का साथ छूटेगा. दिल भी टूटेगा आग लगेगी ह्रदय में जब कोई अपना रूठेगा. पर तू है इश्वर की श्रेष्ठ रचना तू टूटेगी तो इश्वर भी टूटेगा देखो अपने आप को और समझो क्या समय रुका है कि ...
तेरी आँखों के प्यासे मयकदे में मैं पीता हूँ हमेशा रात अक्सर तेरी नज़रों की काली कोठरी में गुजारूं उम्र अपनी मैं यूँ हसकर तेरी आँखे नशे की बंद बोतल ये खुल जाएँ उठू फिर फिर मैं गिरकर मुझे रहने द ...
कभी आना मेरे आँगन में और देखो तुम्हारे बिना छाँव नहीं है कभी आना मेरे मन उपवन में और देखो तुम्हारे बिना सुगंध नहीं है कभी आना मेरे घर साँझ ढले और देखो तुम्हारे बिना प्रकाश नहीं है मैं जा ...
जब भी होता हूँ तन्हा तो आता है ये ख्याल मुझे कि तुम चले गए न जाने कहा मुझे यूँ छोड़ कर कि जैसे छोड़ दे कोई माँ अपने अबोध बालक को रोता बिलखता क्या तुम्हे न आया एक पल भी ये ख़याल कि कैसे जियूँगा मैं ...
हर ओर दिवाली है मेरे मन में अँधेरा है मैं नहीं यहाँ पे तन्हा ग़म साथ में तेरा है यादों के साथ चल के मैं हूँ आ गया यहाँ तक परछाई तो दिखती है, दिखता नहीं चेहरा है खाली मकान जैसा दिल भी ह ...
स्वछंदता के आकाश पर आकाँक्षाओं के सूरज को विषमताओं का ग्रहण जीवन के तपते रेगिस्तान में स्वहित की मंगल कामनाओं को अपनों की आकाँक्षाओं का ग्रहण नियति के रंगमंच पे निकट भविष्य की योजनाओं को परि ...
मेरी बाँह कोई पकड़ो मुझे हाथ में उठा लो भटका हुआ मैं राही मुझे रास्ता दिखा दो चले कौन पथ पथिक ये, किस राह मेरी मंजिल जाऊं किधर यहाँ से मुझे अब कोई बता दो रस्ता भटक गया हूँ नहीं साथ कोई दीपक हुआ काल ...
रिन्द हैं तन्हा अकेले फ़िक्र क्या शामों तले रास्ते दुस्वार यूँ दो चार पैमाने तले हो थकन पाँवो में तो क्या चाह यूँ मिट जायेगी तुम गिरे तो हम चलें और हम गिरें तो तुम चले साथ यूँ दामन ...
BEWARE AIDS Jab bhi karo sambhog kisi se Pehle tum candom lagaao Arange karo ya love marriage Pehle HIV test karao Durghatna ho ya koi aafat Khoon ki ho tumhe koi jaroorat Idhar udhar se mat le ...
मेरी देख तू हिमाकत, यूँ ही घुट रहा हूँ कब से सब जानते हैं वो सच, जो न कह सका मैं तुझसे मेरा दर्द जो तू जाने, कभी दूर यूँ न जाये मुझे क्या गिला हो तुमसे, क्या है प्यार जो तू समझे मुझे है भरोसा अब भ ...
सफ़र ये ज़िन्दगी क्यूँ जा रहा है तन्हा तन्हा सा मेरे दिल को ये क्या तड़पा रहा है तन्हा तन्हा सा खालिस सी हो रही सीने में क्यूँ ये आज फिर मेरे बुझा सा जा रहा दिल आज फिर क्यूँ तन्हा तन्हा सा ...
हमें समझने का जो दावा करते आयें हैं उन्हें भी हमने बड़ी मुद्दतों के बाद समझा मेरे रक़ीब भी रोते हैं मेरे हाल पे आज खुद अपना हाल बड़ी ज़हमतों के बाद समझा यही रिवाज़ है क़ायम तेरे ज़माने का ...
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Ishq, muhabbat, pyaar or jindagi se jaddozehed ki tasveer,
jo dil ko dikhaai di, duniya ko dkhaai hamne,
khata hui, agar pyaar kiya tumse,
toh saza bhi paayi humne