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कल जो मेरे साथ में था, तन्हा-तन्हा वो जाने क्यूँ?
उनके दिल की ही वो जाने, अपने दिल की वो जाने क्यूँ?
चट्टानों में आग लगी, क्यूँ धुँआ उठा वो जाने क्यूँ?
बुरा वक़्त है, हवा बुरी, अब वो हमको पहचाने क्यूँ?
शम्मा बदली, युग भी बदला, न बदले परवाने क्यूँ?
सदियाँ बीत गयीं, सीखे ना अब भी ये दीवाने क्यूँ?
दिन के मास, मास के वर्षों, बन जाते न जाने क्यूँ?
कई गुज़र में साथ रहे पर अब भी हम अनजाने क्यूँ?
झूठ भी तेरे सच लगते, तूने इतने गढ़े फ़साने क्यूँ?
सच्चाई से वाकिफ सब , फिर इतने कहे बहाने क्यूँ?
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