Share article अभिलाषा: किसी पर्वत से भिड़ जाने की, बादल बन के उड़ जाने ...
किसी पर्वत से भिड़ जाने की, बादल बन के उड़ जाने की
सूरज संग पेंच लड़ाने की मेरी अभिलाषा बाकी है.
सपने जिंदा हैं मरें नहीं, अरमां अभी पूरे करे नहीं
ऊँचे अभी पेंग बढ़ाने की मेरी अभिलाषा बाकी है.
सौ मील चला और सिफ़र रहा, पर तेज़ हवा में निडर रहा.
अभी आंधी से टकराने की मेरी अभिलाषा बाकी है.
कितना भी बिकट सितम होगा हौसला कभी न कम होगा
तकदीरों से लड़ जाने की मेरी अभिलाषा बाकी है.
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