Share article मुझे खा जाएगी तन्हाई.और तुम्हे भी.: मेरे होने न होने का व ...
मेरे होने न होने का वजूद नहीं है.
क्यूँ ऐसे हालात पैदा हुए हैं?
क्यों मेरा फलसफा सिर्फ मेरा है?
ऐसा तो नहीं था मैं और ना ही तुम.
मैं अकेला जी रहा हूँ और तुम भी.
मेरा समाज मर चुका है.
और तुम्हारा भी.
ज़िन्दगी के रंग काले पड़ गए.
विधवा सा जीवन जी रहा हूँ मैं.
और तुम भी.
क़ैद एक दायरे में.
यहाँ से वहाँ और वहाँ से यहाँ.
बस इतनी सी दुनिया है क्या?
शायद इतनी ही होगी?
मेरी भी और तुम्हारी भी.
मुझे खा जाएगी तन्हाई.
और तुम्हे भी.
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Thanks nidhi.
aage jaroor khushi par likhunga.