Share article मुझे अकेला छोड़ दो: प्रिये, मुझे अकेला छोड़ दो प्रत ...
प्रिये,
मुझे अकेला छोड़ दो
प्रतिकूल समय और परिस्तिथियों में,
मुझे अकेला छोड़ दो.
इसे तुम स्वार्थ कहो या मेरा अभिमान,
या मुझे कुछ और नाम दो, जो तुम्हे सूझता हो,
और मुझे अकेला छोड़ दो.
वक़्त जो मेरा है और बेहतर नहीं है,
उसे अपना ही रखूँगा
और सिर्फ अपना.
तुम्हारा कोई हक नहीं उसपे
इसलिए मुझे अकेला छोड़ दो.
तन्हाई मुझे ताक़त देगी,
फिर से खुद को समेटने,
जुड़ने और उठ खड़ा होने की
इसलिए मुझे अकेला छोड़ दो.
डरो मत चिंता भी मत करो,
ऐसे हालात ले के कुछ नहीं जाते,
सिर्फ दे जाते हैं,
और बेहतर जीने का तरीका
और
सुधार का एक और मौक़ा
इसलिए मुझे अकेला छोड़ दो.
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Shukriya Vijay Nanda ji.