Saturday 20 february 2010 6 20 /02 /Feb /2010 19:32
महान क्रांतिकारी कवी और शायर आशुतोष जी का अवतरण राजस्थान के नागौर जनपद के एक अस्पताल में चैत की अष्टमी संवत २०३७ को माना जाता है . हालाँकि इनकी जन्म तिथि के बारे में विद्वानों में मतभेद हैं. कुछ विद्वान् इनका जन्म ईसा ३६०० पूर्व भी मानते हैं. लेकिन इनकी प्रमाणिक जन्मतिथि २०३७ ही पायी गयी है. कई ग्रंथो में इनके जन्म दिनांक का उल्लेख मिलता है.
इनकी प्राथमिक सिक्छा उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में हुई थी . बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के आशुतोष जी का मन स्कूली पढाई में कभी न लगा . एक बार स्कूली दिनों में नक़ल करते हुए भी पकडे गए थे ऐसा उल्लेख समकालीन ग्रंथो में मिलता है . बचपन से घूमने के शौक़ीन कविवर को स्कूली दिनों में ही घूमने का चस्का लग गया था . वो अक्सर घर से स्कूल के बहाने निकल कर समीप के स्टेशन पे बैठ कर आती जाती रेल गाड़ियों को देखा करते थे. ऐसा उल्लेख पुरानी किताबों में मिलता है .
माता पिता के लाख पर्यासों के बाद भी ये कॉलेज से आगे की पढाई न कर सके. किताबी सिक्छा की जगह इन्होने हमेशा व्यावहारिक सिक्छा को प्राथमिकता दी . कॉलेज में कभी भी क्लासों में न पाए जाने वाले कविवर हमेशा कॉलेज समय में बाज़ार में घुमते मिल जाया करते थे . निर्मल स्वभाव के आशुतोष जी को इनके दोस्त हमेशा बहला फुसला के इनसे समोशा आदि खा लिया करते थे . दोस्तों के लिए इनके मन में हमेशा असीम ममता रही. दोस्तों की माँ, बहन, बीवियों को इन्होने हमेशा अपनी माँ, बहन, बीवी समझा और कभी भेद नहीं किया. हमेशा मजदूरों और गरीबों के लिए लड़ने वाले आशुतोष जी ने कई मजदूर आन्दोलनों में बढ चढ़ कर हिस्सा लिया और जेल भी गए. हालाँकि कई आलोचकों का मानना है की ये मजदूर आन्दलोनो में नहीं बल्कि गांजे की तस्करी की वजह से जेल गए और इनके कई पत्रकार मित्र इनकी गिरफ्तारी को अखवारों में मजदूर अन्दलानो से जोड़ देते थे. अपनी जवानी के दिनों में इनके कई महिलायों से अन्तरंग प्रेम प्रसंग भी चर्चित हुए लेकिन अपनी जीवनी "चूतिया का चक्कर" में इन्होने उसका खंडन करते हुए लिखा है की वो सिर्फ उनकी अच्छी मित्र थी और कुछ नहीं .
कई इतिहासकार इनपे शराबखोरी का इलज़ाम भी लगाते हैं. बताते हैं ये कई बार नशे में बेशुध नालियों में पायें गए हैं. अपने दोस्तों में ये पैगचोर के नाम से मशहूर थे. खैर विवादों से तो हर महान शख्सियत को दो चार होना पड़ा है . वैसे एक दो अपवादों के अलावा इन्होने हमेशा मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी. जिसकी वजह से इनपे कई झूठे और गलत आरोप भी लगे. ऐसा उल्लेख मिलता है की ये मजदूरों की गाडी कमाई का एक बड़ा हिस्सा चिटफंड के जरिये धोखाधडी से खा गए. लेकिन पुलिस जांच में हमेशा दूध का दूध मिला और कभी कुछ साबित न हो सका .
आशुतोष जी ने हमेशा हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए काम किया. संवत ३०४३ में इनके प्राण ह्रदय घात की वजह आकाश कुसुम हो गए. लेकिन कुछ विद्वानों ने अब प्रमाणित कर दिया की ज्यादा शराब की वजह से इनके गुर्दे फेल हो गए थे .
हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक आशुतोष जी की मृत्यु के बाद इनके हिन्दू मुस्लिम अनुयायी इस बात पे लड़ गए की इन्हें जलाया जाए की दफनाया जाए . लेकिन बताते हैं इनकी मृत्युशय्या के उपर पड़ी चादर जब हटाई गई तो इनके शरीर की जगह देसी दारु के पौवे मिले. जिन्हें हिन्दू मुस्लिम ने मिल बाँट के पिया.

By ashutosh - Posted in: ghazals & shayari - Community: Zajbaat
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