Wednesday 9 september 2009
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11:15
बेज़ुबां दर्द को पलकों से फिसलते देखा
हमने आँखों में किसी शूल को चुभते देखा
अपने होंठो पे तो खुद हमने लगाये ताले
फिर भी इस दिल में समंदर को मचलते देखा
बूँद आँखों से जो टपकी थी बन गयी बादल
ग़म को फिर हमने आसमाँ से पिघलते देखा
जिसका वादा था हमसे दर्द में शरीकों का
वो मेरे ग़म पे हमने आज फिर हँसते देखा
मयकदे शाकी की मर्ज़ी से महकते देखे
खुद को पैमाना-ऐ-शाकी को तरसते देखा
ज़िन्दगी हमने गुजारी है जिसकी चाहत को
उसकी चाहत को ही गैरों पे बरसते देखा
By ashutosh
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Monday 7 september 2009
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13:51
Badi takleef me tha aa fasi thi jaan saansat me
kaha usne tha jab mai jaa raha hu raaste apne
kaleja kaanp uttha tha nazar bhar bhar k aayi thi
mere kadmo k neeche na rahe the paanv khud apne
kami kuch thi nahi paayi mili fir bhi ye rusvaai
yu aise hi achanak se bhala, toote hain kyu sapne
baharo se utha patjharh me laa patka mujhe tumne
mere dil ka tamasha kar k man behlaaya khud tumne
kabhi socha na tha ye aag apna ghar jala degi
ye dil k khel me aafat khudi ko khud kari humne
बड़ी तकलीफ में था आ फंसी थी जान सांसत में
कहा उसने था जब, मैं जा रहा हूँ रास्ते अपने
कलेजा काँप उठता था, नज़र भर भर के आई थी
मेरे कदमों के नीचे ना रहे थे पाँव खुद अपने
कमी कुछ थी नहीं पायी मिली फिर भी ये रुसवाई
यूँ ऐसे ही अचानक से भला, टूटे हैं क्यूँ सपने
बहारों से उठा पतझड़ में ला पटका मुझे तुमने
मेरे दिल का तमाशा कर के मन बहलाया खुद तुमने
कभी सोचा ना था ये आग अपना घर जला देगी
ये दिल के खेल में आफत खुदी को खुद करी हमने
By ashutosh
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Saturday 5 september 2009
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11:47
बड़ा खामोश रहता था
छुपा के दिल में रखता था
मेरे ग़म को उघाड़ा
आ के तुमने सामने फिर से
चला था भूलने सबको
दिए थे दर्द जो तुमने
मेरे दिल को दुखाया
आ के तुमने सामने फिर से
बड़ी मुश्किल से रोका था
किया था हौसला हमने
मेरी ताक़त को तोड़ा
आ के तुमने सामने फिर से
खड़े हो के न यूँ देखो
बड़ी मुद्दत में आये हो
गले मेरे लिपट जाओ
के आ के सामने फिर से
By ashutosh
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Friday 4 september 2009
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11:04
एक ख़्वाब सुहाना टूट गया
एक ज़ख्म अभी तक बाक़ी है
जो अरमा थे सब ख़ाक हुए
बस राख अभी तक बाक़ी है
जब उड़ते थे परवाजें थी
सूरज को छूने निकले थे
सब पँख हमारे झुलस गए
पर चाह अभी तक बाक़ी है
पर्वत से अक्खड़ रहते थे
तूफानों से भिड़ जाते थे
तिनकों के जैसे बिखर गए
पर ताव अभी तक बाक़ी है
लहरों से बहते थे हरदम
दीवाने थे मतवाले थे
दिन गुज़र गए वो मस्ताने
पर याद अभी तक बाक़ी है
By ashutosh
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Thursday 3 september 2009
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03
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/2009
11:07
उसने जब ऐसा कहा होगा
किसी नीम के नीचे खड़ा होगा
उसकी जादुई बातों का असर
तेरी समझ से परे रहा होगा
वो जब भी बोलता है कुछ
तो बस वो प्यार कहता है
उसने कुछ कहा होगा
तुमने कुछ सुना होगा
वो मुझसे प्यार करता है
कहा था उसने खुद मुझसे
कहीं रुसवा न हो चाहत
तुझे यूँ टालता होगा
बड़ा बैचैन रहता हूँ
हुआ जबसे ज़ुदा उस से
करूँगा कह के क्या उस से
वो खुद ही जानता होगा
मेरे दिल कर न तू चिंता
नहीं यूँ खुद को तू समझा
यूँ ही बस कह दिया होगा
नहीं कुछ दिल में यूँ होगा
By ashutosh
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